ग्वालियर की बदहाल सड़कों पर हाईकोर्ट की सख्ती: सड़क सैंपल जांच, पिछले वर्षों के खर्च का हिसाब और नगर निगम से जुड़े ताज़ा अंतरिम आदेश, इस लेख में पढ़ें
ग्वालियर की खराब सड़कों का मामला अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच तक पहुंच गया है। अगस्त 2026 में अदालत ने सड़कों की गुणवत्ता जांचने और उन पर हुए खर्च का हिसाब मांगने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। कोर्ट का साफ कहना है कि सड़क कितनी मजबूत बनी है, यह कागजी रिपोर्ट या सरकारी भरोसे के आधार पर तय नहीं हो सकता।
अब सड़कों के नमूने लिए जा रहे हैं
सड़क की असली मजबूती जांचने के लिए अब नमूने लिए जा रहे हैं। इंडिया टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक वकीलों और तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम ने यह काम शुरू किया है। पहला नमूना गुढ़ी-गुडा नाका इलाके से लिया गया, और सामग्री मौके पर ही सील कर दी गई।
इस दौरान कोर्ट ने उस आरोप पर भी नाराजगी जताई, जिसमें टेस्टिंग में शामिल एक प्राइवेट लैब पर दबाव बनाने की बात कही गई है।
निगम से मांगा गया पूरा रिकॉर्ड
कोर्ट ने निगम से केवल निर्माण की गुणवत्ता नहीं, बल्कि खर्च का ब्योरा भी मांगा है। हर बदहाल सड़क की मेजरमेंट बुक अदालत में जमा करनी होगी।
निगम ने 2021 से 2026 के बीच की सड़क निर्माण, मरम्मत और पैचवर्क से जुड़े दस्तावेज पेश किए हैं। इनमें खर्च और निर्माण के रिकॉर्ड शामिल हैं। ईटीवी भारत और दैनिक जागरण की रिपोर्ट में भी इसी तरह के रिकॉर्ड मांगे जाने का जिक्र है।
निगम की रिपोर्ट पर उठे सवाल
निगम की रिपोर्ट में शहर की हालत को लेकर कुछ अहम आंकड़े दिए गए हैं। निगम के मुताबिक 28.06 किलोमीटर लंबी सड़कें बहुत खराब हैं और इन पर तुरंत काम होना चाहिए। इसके अलावा दूसरी एजेंसियों की देखरेख वाली 64 मुख्य सड़कों में से 15 को पूरी तरह खराब बताया गया है।
कोर्ट ने निगम को फटकारा
ग्वालियर की बदहाल सड़कों से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने निगम को कड़ी फटकार लगाई। CGINFO24 की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने कहा कि अगर निगम सड़कों की मरम्मत और निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पेश नहीं करता, तो माना जाएगा कि उसे शहर की सड़कें ठीक करने में दिलचस्पी नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि मामला अदालत में होने को काम रोकने का बहाना नहीं बनाया जा सकता।
आयुक्त का तबादला, और सवाल
पहले दिन की सैंपलिंग के बाद नगर निगम आयुक्त संघ प्रिया का तबादला कर दिया गया। अमर उजाला की रिपोर्ट में इस तबादले को हाईकोर्ट की नाराजगी से जोड़कर देखा गया है। हालांकि तबादले का आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं हुआ है, इसलिए इसे केवल मीडिया की व्याख्या के रूप में ही देखें।
एक और मामला: 80 फीट की सड़क का विवाद
इसी बीच अप्रैल 2026 में एक अलग मामला भी चर्चा में रहा। नारायण विहार कॉलोनी के औद्योगिक क्षेत्र में 80 फीट चौड़ी सड़क पर अतिक्रमण का विवाद है। पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार प्रशासन ने दावा किया कि सड़क से अतिक्रमण हटा दिया गया है, जबकि याचिकाकर्ता ने जमीनी हालात को अलग बताया। स्टेटस रिपोर्ट में 80 फीट चौड़ाई का स्पष्ट जिक्र न होने पर कोर्ट ने सवाल उठाए और एक वरिष्ठ अधिवक्ता को कमिश्नर नियुक्त किया। इस कमिश्नर की रिपोर्ट का नतीजा हमें अभी नहीं मिला है।
अब तक क्या तय हुआ है
- सड़कों के नमूने लेकर गुणवत्ता की जांच हो रही है।
- निगम से मेजरमेंट बुक और पिछले वर्षों के खर्च के मूल दस्तावेज मांगे गए हैं।
- मौके के निरीक्षण के लिए वरिष्ठ वकीलों की एक समिति बनी है। यह समिति उन सड़कों को भी देखेगी जिन्हें रिकॉर्ड में पूरा बताया गया है।
- निगम से अलग-अलग हलफनामे भी मांगे गए हैं।
आगे क्या होगा?
अगली सुनवाई की तारीख या अंतिम फैसले की पुष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इसलिए यह अंतिम फैसला नहीं, बल्कि अब तक के अंतरिम कदमों की रिपोर्ट है। जांच में गड़बड़ी मिली, तो मामला और आगे बढ़ सकता है। आखिरकार सड़कों की असली हालत बताने वाली जांच रिपोर्ट ही इस मामले का फैसला करेगी।
Key Highlights
- हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने शहर की बदहाल सड़कों की गुणवत्ता और खर्च की जांच के आदेश दिए हैं।
- सड़कों के नमूने लेकर लैब जांच शुरू हो चुकी है।
- निगम से पिछले वर्षों के मेजरमेंट बुक और खर्च के दस्तावेज मांगे गए हैं।
- कोर्ट ने निगम की रिपोर्ट और DPR न देने पर सख्त टिप्पणी की है।
- जांच के पहले दिन के बाद नगर निगम आयुक्त का तबादला हुआ।
- अंतिम फैसला अभी नहीं आया है, केवल अंतरिम निर्देश हैं।
Important Details
| विषय | जानकारी | स्थिति |
|---|---|---|
| अदालत | मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, ग्वालियर बेंच | पुष्ट |
| मामला | सड़क गुणवत्ता व खर्च (जनहित याचिका) | पुष्ट |
| जांच | सैंपल लैब टेस्टिंग, मौके का निरीक्षण | पुष्ट |
| निगम से मांगा गया | मेजरमेंट बुक, 2020/21 से पांच-छह साल का खर्च | पुष्ट |
| 28 सड़कें / 108 करोड़ | आपके ड्राफ्ट में है | स्रोत से पुष्ट नहीं |
| अंतिम फैसला | नहीं मिला | पुष्ट नहीं |
| अगली सुनवाई | नहीं मिली | पुष्ट नहीं |
FAQ
Q1. ग्वालियर में सड़कों पर हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
हाईकोर्ट ने सड़कों के नमूने लेकर गुणवत्ता जांचने, नगर निगम से मेजरमेंट बुक और खर्च का ब्यौरा मांगने, और मौके के निरीक्षण के लिए समिति बनाने के निर्देश दिए हैं।
Q2. क्या हाईकोर्ट ने फैसला सुना दिया है?
अभी तक मुझे कोई अंतिम फैसला नहीं मिला। अब तक केवल अंतरिम आदेश और निर्देश सामने आए हैं।
Q3. सड़कों की जांच कौन कर रहा है?
कोर्ट की नियुक्त समिति, जिसमें वरिष्ठ वकील और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं, नमूने ले रही है और निरीक्षण कर रही है।
Q4. नगर निगम आयुक्त का तबादला क्यों हुआ?
आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं है। मीडिया में इसे हाईकोर्ट की सख्ती से जोड़कर देखा जा रहा है।
Q5. इस मामले में नागरिक क्या कर सकते हैं?
अपनी सड़क की समस्या की तस्वीर और तारीख के साथ नगर निगम या लोक निर्माण विभाग (PWD) की शिकायत दर्ज करें। जनहित याचिका का हिस्सा बनने के लिए वकील से सलाह लें।
Q6. 80 फीट सड़क वाला मामला क्या है?
यह नारायण विहार कॉलोनी के औद्योगिक क्षेत्र में अतिक्रमण का अलग विवाद है। इसमें कोर्ट ने कमिश्नर नियुक्त किया था।
