भोपाल के एक ही पते से 40 पासपोर्ट जारी होने का खुलासा, STF की जांच में बांग्लादेशियों को भारतीय पहचान दिलाने वाला नेटवर्क सामने आया। पढ़ें पूरी जांच रिपोर्ट।
भोपाल के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र स्थित अन्ना नगर के एक मठ के पते से करीब 40 लोगों के नाम पर पासपोर्ट जारी हो चुके हैं। मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में यह खुलासा हुआ है कि यह पूरा नेटवर्क बांग्लादेश से भारत आए लोगों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय नागरिक बनाकर असली पासपोर्ट दिलाता था।
एक ही पते पर दर्जनों पासपोर्ट जारी होना अपने आप में पुलिस वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब एसटीएफ यह जांच रही है कि सत्यापन के दौरान इतनी बड़ी गड़बड़ी सालों तक नजरअंदाज कैसे होती रही और इसमें किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही।
कैसे तैयार होती थी फर्जी भारतीय पहचान
एसटीएफ के मुताबिक गिरोह पहले बांग्लादेश से भारत आए लोगों की जानकारी जुटाता था। इसके बाद उनके नाम पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज तैयार कराए जाते थे। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारतीय पता और पहचान पुख्ता की जाती थी, और अंत में पासपोर्ट के लिए आवेदन कर दिया जाता था। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरा तरीका सुनियोजित था—पहले फर्जी पहचान, फिर दस्तावेजों की एक कड़ी, और आखिर में असली पासपोर्ट।
भोपाल के मठ से 40 और डबरा से करीब 30 पासपोर्ट
जांच में सामने आया है कि भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र के अन्ना नगर स्थित एक मठ के पते से लगभग 40 लोगों के नाम पासपोर्ट जारी हुए। वहीं ग्वालियर के डबरा में सिमरिया टेकरी स्थित बौद्ध विहार कॉलोनी के एक ही पते से करीब 30 फर्जी पासपोर्ट बनाए गए। नवभारत लाइव की रिपोर्ट के मुताबिक ये सभी पासपोर्ट 2021 से 2023 के बीच जारी किए गए थे।
हालांकि डबरा के आंकड़ों को लेकर रिपोर्टों में अंतर है। लल्लूराम डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार डबरा के इसी पते से करीब 21 पासपोर्ट आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 17 पासपोर्ट बनकर जारी हो चुके थे। भोपाल और डबरा को मिलाकर एसटीएफ को अब तक 70 से ज्यादा संदिग्ध पासपोर्ट की जानकारी मिल चुकी है।
डबरा से खुला सुराग, थाने पहुंचने से पहले मिल जाती थी सूचना
जांच की शुरुआत डबरा में हुए एक पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान हुई, जहां दस्तावेजों और पते को लेकर गड़बड़ियां पकड़ में आईं। इसी जांच के तार बाद में भोपाल के मठ तक जा पहुंचे। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक जांच में यह भी सामने आया है कि संदिग्ध पासपोर्ट आवेदन डबरा थाने पहुंचने से पहले ही वहां फोन कर दिया जाता था और आवेदन को जल्दी निपटाने के लिए कहा जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आवेदन की जानकारी पहले से किसे मिल जाती थी और कौन इस प्रक्रिया में मदद कर रहा था।
वैरिफिकेशन में मिलीभगत की आशंका, जांच के घेरे में अधिकारी
एक ही पते से इतनी बड़ी संख्या में पासपोर्ट आवेदन आने के बावजूद दस्तावेज और पता सत्यापन में गड़बड़ी सालों तक पकड़ में नहीं आई। द सूत्र की रिपोर्ट के अनुसार एसटीएफ अब यह जांच रही है कि सत्यापन प्रक्रिया में चूक कहां हुई, और इसमें शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। यह अभी जांच का विषय है और किसी पुलिसकर्मी या अधिकारी पर मिलीभगत का आरोप अब तक साबित नहीं हुआ है। एजेंसियों का कहना है कि अगर लापरवाही या मिलीभगत की पुष्टि होती है, तो आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
नवभारत लाइव की रिपोर्ट में भी इसी सवाल को दोहराया गया है कि एक ही मठ या विहार के पते से दर्जनों पासपोर्ट जारी होना सिस्टम की एक बड़ी चूक है, और एसटीएफ यह पता लगा रही है कि सत्यापन के दौरान यह गड़बड़ी क्यों नहीं पकड़ी गई।
बैतूल और छिंदवाड़ा तक भी फैला नेटवर्क
लल्लूराम डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक इस रैकेट के तार सिर्फ भोपाल और डबरा तक सीमित नहीं हैं। जांच में बैतूल और छिंदवाड़ा जिलों से भी फर्जी पासपोर्ट जारी होने की जानकारी सामने आई है। इससे साफ है कि यह नेटवर्क मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में सक्रिय रहा है।
मास्टरमाइंड जेल में, टीम असम रवाना
एसटीएफ एसपी राहुल लोढ़ा के मुताबिक अब तक इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि गिरोह का कथित मास्टरमाइंड रियाल चौधरी जेल में बंद है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार रियाल के नाम से खुद चार पासपोर्ट मिले हैं, जिनमें फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का संदेह है। पूछताछ के बाद पता चला कि गिरोह के तार असम से भी जुड़े हैं, जिसके बाद एसटीएफ की पांच सदस्यीय टीम असम रवाना कर दी गई है।
डबरा में जांच का नेतृत्व कर रहे एसपी राजेश भदौरिया के हवाले से भी नेटवर्क की कार्यप्रणाली से जुड़ी जानकारी सामने आई है।
बौद्ध अनुयायी बनकर विदेश यात्राएं
जांच में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। फर्जी भारतीय पासपोर्ट हासिल करने वाले कुछ लोग खुद को बौद्ध अनुयायी बताकर विदेश यात्राएं करते थे। एसटीएफ को इनके थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान जाने के सुराग मिले हैं। एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि क्या इन यात्राओं का मकसद सिर्फ फर्जी पहचान का इस्तेमाल था, या इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क भी सक्रिय है। इसी कड़ी में एक बांग्लादेशी नागरिक नागपुर में भिक्षु बनकर रहते हुए गिरफ्तार भी किया जा चुका है।
2023 में ही मिल चुका था विदेश मंत्रालय का अलर्ट
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक विदेश मंत्रालय ने साल 2023 में ही मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय को फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने को लेकर आगाह किया था। उस समय करीब 70 संदिग्ध फर्जी पासपोर्ट सामने आए थे, जिनकी संख्या बाद में 100 से ज्यादा होने की आशंका जताई गई थी। यानी मौजूदा खुलासा किसी नई शुरुआत का नहीं, बल्कि पहले से चल रही जांच का ही विस्तार है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
फर्जी भारतीय दस्तावेजों के जरिए बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान गढ़ने के मामले मध्य प्रदेश में पहले भी सामने आ चुके हैं। साल 2025 में भोपाल के कोलार इलाके में दो बांग्लादेशी भाइयों के फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट का मामला उजागर हुआ था। रिपोर्टों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में भी बड़े पैमाने पर फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने के मामले सामने आ चुके हैं।
आगे की जांच
एसटीएफ का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और उसी आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। असम गई टीम की रिपोर्ट के बाद मामले में और खुलासे होने की संभावना है। जांच एजेंसियां इसे सिर्फ दस्तावेजी फर्जीवाड़े तक सीमित न मानते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं के तौर पर भी देख रही हैं, इसलिए मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
FAQ:
Q1. भोपाल के फर्जी पासपोर्ट रैकेट का खुलासा कैसे हुआ?
Answer: डबरा (ग्वालियर) में एक पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान दस्तावेजों में गड़बड़ी पकड़ में आई थी, जिसकी जांच बाद में भोपाल के गोविंदपुरा स्थित एक मठ तक जा पहुंची, जहां से एक ही पते पर करीब 40 पासपोर्ट जारी हुए मिले।
Q2. गिरोह किस तरह से फर्जी पासपोर्ट बनवाता था?
Answer: एसटीएफ के मुताबिक गिरोह बांग्लादेश से आए लोगों के नाम पर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराता था, इन्हीं दस्तावेजों के सहारे भारतीय पहचान बनाकर असली पासपोर्ट के लिए आवेदन किया जाता था।
Q3. क्या भोपाल पुलिस की मिलीभगत साबित हो चुकी है?
Answer: अभी नहीं। एसटीएफ यह जांच कर रही है कि पुलिस वेरिफिकेशन प्रक्रिया में यह गड़बड़ी सालों तक क्यों नहीं पकड़ी गई और इसमें किन अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका रही। लापरवाही या मिलीभगत की पुष्टि होने पर आगे गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
Q4. मामले में अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं?
Answer: एसटीएफ के मुताबिक अब तक दो आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि कथित मास्टरमाइंड रियाल चौधरी जेल में बंद है।
Q5. क्या यह नेटवर्क सिर्फ भोपाल-डबरा तक सीमित है?
Answer: नहीं, रिपोर्टों के मुताबिक बैतूल और छिंदवाड़ा जिलों से भी फर्जी पासपोर्ट जारी होने की जानकारी सामने आई है, और गिरोह के तार असम से भी जुड़े मिले हैं, जिसके बाद एसटीएफ की टीम वहां भेजी गई है।
SOURCE/FACT CHECK NOTE: यह लेख निम्न स्रोतों पर आधारित है:
- Navbharat Live (10 सितंबर 2026) — भोपाल (40 पासपोर्ट) और डबरा (30 पासपोर्ट) के आंकड़े, 2021-23 की समयावधि, बौद्ध अनुयायी बनकर विदेश यात्रा, मास्टरमाइंड रियाल चौधरी, असम कनेक्शन, SP राहुल लोढ़ा का बयान।
- The Sootr (10 सितंबर 2026) — दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया (आधार-पैन-जन्म प्रमाणपत्र), कुल 70+ संदिग्ध पासपोर्ट, वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर सवाल।
- Dainik Jagran MP-CG (9 सितंबर 2026) — 2023 का विदेश मंत्रालय अलर्ट, मास्टरमाइंड के नाम 4 पासपोर्ट, डबरा थाने को पहले से सूचना मिलने की बात, SP राजेश भदौरिया का संदर्भ।
- Lalluram.com (10 सितंबर 2026) — डबरा में 21 आवेदन/17 पासपोर्ट का आंकड़ा, बैतूल-छिंदवाड़ा कनेक्शन। नोट: डबरा में जारी पासपोर्ट की संख्या को लेकर स्रोतों में अंतर है (करीब 30 बनाम 21 आवेदन/17 पासपोर्ट), जिसे लेख में स्पष्ट किया गया है। पुलिस मिलीभगत का आरोप अभी जांच का विषय है, यह सिद्ध तथ्य नहीं है — इसे लेख में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। जांच अभी जारी है, इसलिए आगे की गिरफ्तारियों और आरोप-पत्र से जुड़ी जानकारी अपडेट होने पर जोड़ी जानी चाहिए।
