Jharkhand में JPSC-JSSC परीक्षा घोटाले पर छात्रों का आंदोलन तेज़, CID रेड, चेयरमैन इस्तीफा, CBI जांच की मांग। जानें पूरी टाइमलाइन और ताज़ा अपडेट।
झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों छात्रों के गुस्से का केंद्र बनी हुई है। JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर सैकड़ों अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से सड़कों पर हैं। यह आंदोलन अब सिर्फ रांची तक सीमित नहीं रह गया है — छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी, तो झारखंड के सभी 24 जिलों में यह उबाल फैल सकता है।
आखिर यह पूरा विवाद क्या है, किसने क्या आरोप लगाए, अब तक क्या कार्रवाई हुई और छात्रों की मांगें क्या हैं — आइए पूरी बात विस्तार से समझते हैं।
मामला शुरू कैसे हुआ?
विवाद की जड़ है 14वीं JPSC कंबाइंड सिविल सर्विसेज प्रीलिम्स परीक्षा, जो इस साल 19 अप्रैल को आयोजित हुई थी। जब इसका रिजल्ट घोषित हुआ, तो सोशल मीडिया पर एक OMR शीट वायरल हो गई। दावा किया गया कि एक अभ्यर्थी ने पेपर-1 में सिर्फ 48 सवालों के जवाब दिए थे, जबकि क्वालिफाइंग मार्क्स के लिए कम से कम 144 अंक जरूरी थे — फिर भी वह अभ्यर्थी पास घोषित कर दिया गया।
इस खुलासे के बाद JPSC दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और राज्य सरकार को मजबूरन CID को SIT बनाकर जांच के आदेश देने पड़े।
अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई?
इस मामले में पिछले कुछ हफ्तों में कई बड़े घटनाक्रम हुए हैं:
- CID रेड और FIR: 21 जुलाई को CID और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने JPSC मुख्यालय और परीक्षा संचालन एजेंसी के दफ्तर पर छापेमारी की। अगले दिन यानी 22 जुलाई को FIR दर्ज कर 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
- चेयरमैन का इस्तीफा: छापेमारी के बाद JPSC चेयरमैन एल. ख्यांगते (पूर्व मुख्य सचिव) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया।
- लगातार पूछताछ: CID ने ख्यांगते को कई बार पूछताछ के लिए बुलाया — 28 जुलाई को करीब 9 घंटे और 29 जुलाई को करीब 7 घंटे की पूछताछ हुई। एहतियातन उनका पासपोर्ट भी जब्त कर लिया गया ताकि वे विदेश न जा सकें।
- गिरफ्तारियों का सिलसिला: अब तक इस मामले में 11 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें JPSC की डिप्टी एग्जामिनेशन कंट्रोलर श्वेता कुमारी गुप्ता और आउटसोर्सिंग एजेंसी TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के डायरेक्टर और सहयोगी शामिल हैं। एक अभ्यर्थी सुमन सौरभ को भी गिरफ्तार किया गया, जिसने पूछताछ में कथित तौर पर अनुचित तरीकों से परीक्षा पास करने की बात कबूल की।
- राज्यव्यापी छापेमारी: 3 अगस्त को CID ने रांची, धनबाद, बोकारो, देवघर, गोड्डा, रामगढ़, हजारीबाग और पलामू सहित 20 से ज्यादा जगहों पर एक साथ छापेमारी की, जिसमें कई कोचिंग सेंटर भी शामिल थे।
- परीक्षाएं स्थगित: इस पूरे विवाद के चलते JPSC ने कंबाइंड सिविल सर्विसेज मुख्य परीक्षा 2025 को स्थगित कर दिया है, साथ ही कई अन्य आगामी भर्ती परीक्षाएं भी टाल दी गई हैं — जिससे हजारों अभ्यर्थी असमंजस में हैं।
छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?
29 जुलाई से रांची के एक स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरना दे रहे छात्र लगातार नारेबाजी कर रहे हैं — “JPSC में CBI जांच कराओ“, “छात्र एकता जिंदाबाद” जैसे नारे गूंज रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगें हैं:
- 19 अप्रैल को हुई 14वीं JPSC कंबाइंड प्रीलिम्स परीक्षा को रद्द किया जाए
- मामले की जांच CBI और ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी जाए
- भर्ती एजेंसियों में पारदर्शिता और संरचनात्मक सुधार लाए जाएं
- कट-ऑफ मार्क्स और चयन प्रक्रिया से जुड़ी सारी जानकारी सार्वजनिक की जाए
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के मुताबिक, यह आंदोलन ठीक एक महीने पहले शुरू हुआ था और सोमवार को यह लगातार नौवें दिन में प्रवेश कर गया।
राजनीतिक घमासान भी तेज
इस मुद्दे पर सियासत भी गरमा गई है।
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि JPSC चेयरमैन का इस्तीफा, 7 लोगों की गिरफ्तारी और CID जांच — यह सब उनकी सरकार की जवाबदेही का नतीजा है, और वे “भाजपा के 17 साल के पापों को धोने” का काम कर रहे हैं।
वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि चेयरमैन ने इस्तीफा तो दे दिया, लेकिन आयोग के बाकी सदस्यों को अब तक नहीं हटाया गया है। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कांग्रेस पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया — उनका कहना है कि कांग्रेस देश के दूसरे राज्यों में पेपर लीक पर तो मुखर रहती है, लेकिन झारखंड के मामले पर चुप्पी साधे हुए है।
CJP का समर्थन
गौरतलब है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक को लेकर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के 25 जुलाई को इस्तीफे के बाद खत्म हो गया था। लेकिन अब CJP संस्थापक अभिजीत डिपके ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी झारखंड के इस आंदोलन के साथ भी खड़ी है और छात्रों की मांगों का पूरा समर्थन करती है।
आगे क्या?
फिलहाल छात्रों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा। CID की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और अब यह JPSC के शीर्ष अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। छात्रों की चेतावनी है कि अगर सरकार जल्द ठोस कार्रवाई नहीं करती, तो यह आंदोलन रांची से निकलकर पूरे झारखंड में फैल सकता है। ऐसे में आने वाले दिन झारखंड सरकार और JPSC दोनों के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं।
(यह एक डेवलपिंग स्टोरी है। नई जानकारी सामने आने पर इस लेख को अपडेट किया जाएगा।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. झारखंड में छात्र आंदोलन क्यों हो रहा है?
14वीं JPSC कंबाइंड सिविल सर्विसेज प्रीलिम्स परीक्षा के रिजल्ट में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर छात्र रांची में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों को भी पास कर दिया गया।
2. JPSC चेयरमैन ने इस्तीफा क्यों दिया?
CID की छापेमारी और परीक्षा में अनियमितता के आरोपों के बाद JPSC चेयरमैन एल. ख्यांगते ने खुद पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए इस्तीफा दिया।
3. इस मामले में अब तक कितनी गिरफ्तारियां हो चुकी हैं?
अब तक इस मामले में 11 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें JPSC अधिकारी, आउटसोर्सिंग एजेंसी के डायरेक्टर और एक अभ्यर्थी भी शामिल हैं।
4. छात्र किस एजेंसी से जांच की मांग कर रहे हैं?
छात्र JPSC-JSSC परीक्षा घोटाले की जांच CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) और ED (प्रवर्तन निदेशालय) जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग कर रहे हैं।
5. क्या JPSC की परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं?
हां, विवाद के चलते JPSC ने कंबाइंड सिविल सर्विसेज मुख्य परीक्षा 2025 सहित कई आगामी भर्ती परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है।
6. CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का इस आंदोलन से क्या संबंध है?
CJP, जो पहले दिल्ली में NEET-UG पेपर लीक को लेकर आंदोलन कर रही थी, ने अब झारखंड के छात्र आंदोलन को भी अपना समर्थन दिया है।
7. यह आंदोलन कब से चल रहा है?
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के अनुसार यह आंदोलन करीब एक महीने पहले शुरू हुआ था और अब लगातार नौवें दिन में प्रवेश कर चुका है। छात्र 29 जुलाई से रांची के एक स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
8. इस विवाद पर राजनीतिक पार्टियों का क्या रुख है?
कांग्रेस सरकार अपनी कार्रवाई (गिरफ्तारी, इस्तीफा, CID जांच) को अपनी जवाबदेही बता रही है, जबकि भाजपा का आरोप है कि सिर्फ चेयरमैन का इस्तीफा काफी नहीं, बाकी आयोग सदस्यों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
