MP सरकार की ‘You Quote We Pay ‘ नीति में डॉक्टर खुद बताएंगे सैलरी। जानें भत्ते, PG प्राथमिकता, 14 नए मेडिकल कॉलेज और पूरी योजना की डिटेल 2026।
मध्य प्रदेश के गांव और आदिवासी इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने एक अनोखी नीति बनाई है — ‘यू कोट, वी पे’ यानी “आप मांगिए, हम देंगे”। इस नीति के तहत अब डॉक्टर खुद अपनी मनचाही सैलरी बता सकेंगे और सरकार आपसी सहमति के बाद वही वेतन उन्हें देगी।
यह पूरी जानकारी हाल ही में लोकसभा में सामने आई, जब रतलाम-झाबुआ-आलीराजपुर की सांसद अनिता नागर सिंह चौहान ने आदिवासी इलाकों में डॉक्टरों और अस्पतालों की कमी को लेकर सवाल पूछा। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इसका लिखित जवाब देते हुए इस नई नीति की जानकारी दी।
आखिर ‘You Quote We Pay नीति क्यों लाई गई?
मध्य प्रदेश के गांव और कस्बों के सरकारी अस्पतालों में अक्सर बड़े और अनुभवी डॉक्टर सेवा देने से बचते हैं। महिला रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट), बाल रोग विशेषज्ञ और सर्जन जैसे अहम पद लंबे समय तक खाली रहते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है तय सरकारी वेतनमान — शहरों में प्राइवेट प्रैक्टिस से डॉक्टर कहीं ज्यादा कमाई कर लेते हैं, जिस वजह से वे दूरदराज इलाकों में जाने से हिचकते हैं। नतीजा यह होता है कि गांव के मरीजों को समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता।
इसी समस्या को हल करने के लिए सरकार ने ‘यू कोट, वी पे’ नीति तैयार की है।
नीति कैसे काम करेगी?
इस नीति के तहत राज्य सरकार सीधे डॉक्टरों से बातचीत करेगी। सरकार पूछेगी कि दूरदराज या आदिवासी इलाके में सेवा देने के लिए उन्हें कितनी सैलरी चाहिए। डॉक्टर अपनी मांग रखेंगे, जिसे “कोट” कहा जाता है। दोनों पक्षों में सहमति बनने के बाद वही वेतन तय कर दिया जाएगा। इस तरह डॉक्टरों को उनकी मनचाही कमाई मिलेगी और गांव के अस्पतालों को विशेषज्ञ डॉक्टर।
गांव में सेवा देने वाले डॉक्टरों को मिलने वाले फायदे
- दुर्गम क्षेत्र भत्ता — दूरदराज इलाकों में सेवा देने पर विशेष भत्ता
- बेहतर आवासीय सुविधा — रहने के लिए अच्छे क्वार्टर
- PG कोर्स में प्राथमिकता — पोस्ट ग्रेजुएशन एडमिशन में सीधा फायदा और बोनस अंक
- सिजेरियन मानदेय — गायनेकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन और एनेस्थीसिया डॉक्टरों को सिजेरियन ऑपरेशन के लिए अलग से भुगतान
एएनएम और स्वास्थ्य स्टाफ को भी प्रोत्साहन
गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं की जांच करने वाली एएनएम (Auxiliary Nurse Midwife) बहनों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। समय पर टीकाकरण और जांच का रिकॉर्ड रखने के लिए उन्हें विशेष प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। किशोर-किशोरियों की सेहत की देखभाल करने वाले स्टाफ को भी बोनस का प्रावधान रखा गया है।
मल्टी-स्किल ट्रेनिंग: एक डॉक्टर, कई जिम्मेदारियां
विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी को देखते हुए सामान्य डॉक्टरों को मल्टी-स्किलिंग ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके तहत डॉक्टर प्रसूति (डिलीवरी), बच्चों का इलाज और बेसिक एनेस्थीसिया — तीनों जिम्मेदारियां संभाल सकेंगे, जिससे मरीजों का इलाज बीच में न रुके।
मध्य प्रदेश को मिले 14 नए मेडिकल कॉलेज
इसी जवाब में सरकार ने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश के लिए कुल 14 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी मिली है, जिनमें से 6 मेडिकल कॉलेज सीधे आदिवासी बहुल जिलों में बनाए जा रहे हैं। इससे रतलाम-झाबुआ-आलीराजपुर जैसे इलाकों के मरीजों को गंभीर बीमारी के इलाज के लिए इंदौर, भोपाल या अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
फंडिंग का गणित
मेडिकल कॉलेज निर्माण में केंद्र और राज्य दोनों सरकारें मिलकर खर्च उठाती हैं। मध्य प्रदेश जैसे सामान्य राज्यों में केंद्र सरकार 60% हिस्सा देती है, बाकी 40% राज्य सरकार वहन करती है। पूर्वोत्तर राज्यों में केंद्र सरकार का योगदान 90% तक होता है।
जिम्मेदारी किसकी?
संसद में सरकार ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवा मूल रूप से राज्य का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के जरिए बजट और योजनाओं के माध्यम से हर कदम पर मदद कर रही है, ताकि कोई भी नागरिक इलाज से वंचित न रहे।
यह जानकारी लोकसभा में दिए गए सरकारी जवाब पर आधारित है। नीति के क्रियान्वयन और अंतिम शर्तों के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक अधिसूचना देखें।
FAQ Section (Schema-Ready)
Q1. ‘यू कोट, वी पे’ नीति क्या है? यह मध्य प्रदेश सरकार की नई नीति है, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टर गांव या आदिवासी इलाके में सेवा देने के लिए खुद अपनी मनचाही सैलरी बता सकते हैं। सरकार आपसी सहमति के बाद डॉक्टर की मांग के हिसाब से वेतन तय करती है।
Q2. यह नीति किस उद्देश्य से लाई गई है? गांव और आदिवासी इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने और मरीजों को समय पर बेहतर इलाज दिलाने के लिए यह नीति लाई गई है।
Q3. गांव में सेवा देने वाले डॉक्टरों को क्या-क्या फायदे मिलेंगे? ऐसे डॉक्टरों को दुर्गम क्षेत्र भत्ता, बेहतर क्वार्टर, PG एडमिशन में प्राथमिकता और बोनस अंक मिलेंगे। सिजेरियन ऑपरेशन करने वाले गायनेकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन और एनेस्थीसिया डॉक्टरों को अलग से मानदेय भी मिलेगा।
Q4. मध्य प्रदेश को कितने नए मेडिकल कॉलेज मिले हैं? केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के लिए कुल 14 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी है, जिनमें से 6 सीधे आदिवासी बहुल जिलों में बनाए जा रहे हैं।
Q5. मेडिकल कॉलेज निर्माण की फंडिंग कैसे होती है? मध्य प्रदेश जैसे सामान्य राज्यों में केंद्र सरकार 60% हिस्सा देती है, जबकि बाकी 40% राज्य सरकार वहन करती है। पूर्वोत्तर राज्यों में केंद्र का योगदान 90% तक होता है।
Q6. मल्टी-स्किल ट्रेनिंग क्या है? यह सामान्य डॉक्टरों को एक साथ कई जिम्मेदारियां — जैसे प्रसूति, बच्चों का इलाज और बेसिक एनेस्थीसिया — संभालने के लिए दी जाने वाली विशेष ट्रेनिंग है, ताकि विशेषज्ञों की कमी के बावजूद इलाज न रुके।
Q7. यह जानकारी कहां से सामने आई? यह जानकारी लोकसभा में सांसद अनिता नागर सिंह चौहान के सवाल पर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के लिखित जवाब में सामने आई।
Q8. क्या एएनएम और अन्य स्वास्थ्य स्टाफ को भी इस योजना का लाभ मिलेगा? हां, गर्भवती महिलाओं की जांच और टीकाकरण का रिकॉर्ड रखने वाली एएनएम बहनों को विशेष प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, साथ ही किशोर स्वास्थ्य से जुड़े स्टाफ को भी बोनस मिलेगा।
