धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री। जानें उनकी शिक्षा, राजनीतिक करियर, पिछले मंत्री पद और NEET विवाद से जुड़ी पूरी जानकारी।
प्रस्तावना
केंद्र की मोदी सरकार में शिक्षा मंत्रालय को लेकर बड़ा फेरबदल हुआ है। NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद उठे छात्र आंदोलन और उससे जुड़े राजनीतिक दबाव के बीच 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उनके बाद यह अहम जिम्मेदारी भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रह्लाद जोशी को सौंपी गई है। आइए जानते हैं कौन हैं प्रह्लाद जोशी, उनकी शिक्षा कितनी है, और उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और नई नियुक्ति की पृष्ठभूमि
यह पूरा घटनाक्रम 3 मई 2026 को शुरू हुआ था, जब NEET-UG परीक्षा के बाद पेपर लीक और धांधली के गंभीर आरोप सामने आए थे। छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए, और धीरे-धीरे यह मुद्दा सोशल मीडिया से निकलकर एक बड़े छात्र आंदोलन में तब्दील हो गया।
इस बीच 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ। फिर 28 जून 2026 को समाजसेवी सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़ गए और उन्होंने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनकी मांग थी कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदारी तय की जाए। लगातार अनशन के चलते उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। इसी दबाव भरे माहौल में धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया और सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की कमान सौंप दी।
प्रह्लाद जोशी का व्यक्तिगत परिचय
प्रह्लाद वेंकटेश जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को हुआ था। अपने शुरुआती दिनों में वे पेशे से उद्योगपति थे, इसके बाद उन्होंने राजनीति का रुख किया।
शैक्षणिक योग्यता
प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक के हुबली स्थित केएस आर्ट्स कॉलेज से बैचलर ऑफ आर्ट्स (बीए) की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक यूनिवर्सिटी, धारवाड़ से भी अपनी शिक्षा जारी रखी। छात्र जीवन से ही उनकी रुचि सामाजिक मुद्दों और जन-कार्यों में रही है।
राजनीतिक करियर की शुरुआत
प्रह्लाद जोशी ने 1992 से 1994 के दौरान हुबली के ईदगाह मैदान (जिसे कित्तूर रानी चेन्नम्मा मैदान भी कहा जाता है) में तिरंगा फहराने के लिए एक आंदोलन का आयोजन कर खुद को राजनीतिक मैदान में उतारा। इस आंदोलन को उस दौर में “कश्मीर बचाओ आंदोलन” के नाम से जाना गया, जिसने उन्हें कर्नाटक के कई हिस्सों में एक पहचाना हुआ चेहरा बना दिया। इसके बाद वे धारवाड़ जिले में भाजपा जिला अध्यक्ष चुने गए।
संसदीय सफर: 2004 से लगातार सांसद
प्रह्लाद जोशी ने पहली बार 2004 में 14वीं लोकसभा का चुनाव धारवाड़ उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से लड़ा और जीत दर्ज की। तब से वे लगातार कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद चुने जाते रहे हैं। उनके राजनीतिक अनुभव की प्रमुख बातें:
- 2004 — पहली बार लोकसभा सांसद निर्वाचित
- 2014-2016 — भाजपा कर्नाटक राज्य इकाई के अध्यक्ष
- 2014-2018 — लोकसभा अध्यक्ष के पैनल के सदस्य
- 2019 से अब तक — केंद्रीय संसदीय कार्य, कोयला एवं खान मंत्री
वर्तमान में कौन-कौन से मंत्रालय संभाल रहे हैं
शिक्षा मंत्रालय मिलने से पहले ही प्रह्लाद जोशी के पास कई अहम जिम्मेदारियां थीं:
- संसदीय कार्य मंत्रालय
- कोयला और खान मंत्रालय
- उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
- नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
अब इसमें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी जुड़ गया है, जिससे उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं।
भाजपा में छवि: अनुभवी संगठनकर्ता और संसदीय रणनीतिकार
भाजपा के भीतर प्रह्लाद जोशी को एक अनुभवी संगठनकर्ता और संसदीय रणनीतिकार माना जाता है। पिछले दो दशकों में उन्होंने पार्टी संगठन और सरकार, दोनों में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। संसद में सरकार के विधायी कार्यों के समन्वय में भी उनकी अहम भूमिका रही है।
विवाद जो करियर के साथ जुड़े रहे
प्रह्लाद जोशी का राजनीतिक सफर पूरी तरह विवादों से अछूता नहीं रहा:
- हुबली ईदगाह मैदान आंदोलन को लेकर विपक्ष ने उन पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के आरोप लगाए, जबकि भाजपा इसे राष्ट्रवादी आंदोलन बताती रही।
- संसदीय कार्य मंत्री रहते हुए विपक्ष ने आरोप लगाया कि कई विधेयकों पर संसद में पर्याप्त चर्चा नहीं हुई, हालांकि सरकार का कहना था कि विपक्ष के हंगामे के चलते कार्यवाही प्रभावित हुई।
- कोयला मंत्री के तौर पर वाणिज्यिक कोयला खनन और निजी भागीदारी बढ़ाने की नीति को लेकर विपक्ष, श्रमिक संगठनों और पर्यावरण समूहों के साथ भी टकराव देखने को मिला।
निष्कर्ष
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की कमान सौंपा जाना, NEET पेपर लीक विवाद के बाद सरकार की एक बड़ी रणनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे संसदीय अनुभव और संगठनात्मक पकड़ के साथ अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के भरोसे को कैसे बहाल करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. प्रह्लाद जोशी कौन हैं?
प्रह्लाद जोशी भाजपा के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से 2004 से लगातार सांसद हैं। उन्हें अब केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
Q2. प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री क्यों बनाया गया?
धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद यह जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपी गई, जो NEET-UG पेपर लीक विवाद और उसके बाद हुए छात्र आंदोलन के घटनाक्रम के बीच हुआ।
Q3. प्रह्लाद जोशी की शिक्षा (योग्यता) क्या है?
उन्होंने कर्नाटक के हुबली स्थित केएस आर्ट्स कॉलेज से बीए किया है और इसके बाद कर्नाटक यूनिवर्सिटी, धारवाड़ से भी शिक्षा हासिल की।
Q4. प्रह्लाद जोशी पहले कौन-कौन से मंत्रालय संभाल चुके हैं?
वे 2019 से संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय संभाल रहे हैं, साथ ही उपभोक्ता मामले, खाद्य व सार्वजनिक वितरण और नवीन-नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की भी जिम्मेदारी उनके पास है।
Q5. प्रह्लाद जोशी किस लोकसभा सीट से सांसद हैं?
वे कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद हैं और 2004 से लगातार यह सीट जीतते आ रहे हैं।
Q6. प्रह्लाद जोशी का राजनीतिक करियर कैसे शुरू हुआ?
1992-94 के दौरान हुबली के ईदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने के आंदोलन से उन्होंने राजनीति में कदम रखा, जिसके बाद वे धारवाड़ जिले में भाजपा अध्यक्ष बने।
