CJP का NEET पेपर लीक आंदोलन कैसे शुरू हुआ और कैसे खत्म हुआ? जानें 6 जून से 25 जुलाई तक की पूरी टाइमलाइन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक की पूरी कहानी।
करीब 50 दिनों तक चला कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन आखिरकार 25 जुलाई 2026 को खत्म हो गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने जंतर-मंतर से अपना धरना समाप्त करने का ऐलान कर दिया। एक सोशल मीडिया व्यंग्य से शुरू हुआ यह आंदोलन कैसे देश के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक बन गया — पूरी टाइमलाइन यहां पढ़ें।
आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई?
भारत के चीफ जस्टिस ने एक बयान में सरकार के आलोचकों और बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” और परजीवियों से कर दी थी। इसी बयान पर बॉस्टन यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल पूछा कि अगर सभी कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो क्या होगा। इसके बाद दीपके ने एक वेबसाइट बनाई और देखते ही देखते उनके इंस्टाग्राम पेज पर लाखों फॉलोअर्स जुड़ गए — यह संख्या देश की बड़ी पार्टियों से भी ज्यादा हो गई। शुरुआत में इस पेज पर बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और नेताओं के दल-बदल जैसे मुद्दे उठाए गए। बाद में NEET पेपर लीक के मुद्दे ने इस वायरल कैंपेन को जमीनी आंदोलन में बदल दिया।
पूरी टाइमलाइन: कब क्या हुआ
6 जून 2026 — जंतर-मंतर पर पहला प्रदर्शन
CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहला बड़ा प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन NEET-UG 2026 पेपर लीक और CBSE परिणामों में कथित ग्रेडिंग अनियमितताओं के खिलाफ था। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग इसी दिन उठी।
20 जून 2026 — अनिश्चितकालीन धरना शुरू
दिल्ली पुलिस से इजाजत लेकर CJP ने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। शाम को अनुमति की अवधि खत्म होने पर पुलिस ने प्रदर्शन खत्म करने को कहा, लेकिन अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक धरना जारी रखने का ऐलान किया। इसी दौर में धरनास्थल पर बिजली-पानी रोके जाने का विवाद भी सामने आया।
धरने का 9वां दिन — सोनम वांगचुक की एंट्री
पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पहुंचे। राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। इसके बाद आंदोलन को नई ताकत मिली और हरियाणा की खाप पंचायतों के प्रतिनिधि भी समर्थन में पहुंचे। इसी दौरान दिल्ली पुलिस पर धरनास्थल की पानी-स्वच्छता सुविधाएं रोकने के आरोप भी लगे।
हड़ताल के दौरान — वांगचुक की तबीयत बिगड़ी
लंबे समय तक भोजन न लेने से सोनम वांगचुक का वजन करीब 9 किलोग्राम तक घट गया। डॉक्टरों ने हल्के डिहाइड्रेशन की पुष्टि की और आशंका जताई कि लंबा अनशन शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।
8 जुलाई 2026 — संसद मार्च का ऐलान
अनशन के बीच सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से 20 जुलाई को दिल्ली आने की अपील की और कहा कि जब तक संसद तक मार्च नहीं कर लेंगे, वे जीवित रहेंगे।
19 जुलाई 2026 — वांगचुक को जबरन हटाया गया
बिगड़ती सेहत और अदालती आदेश का हवाला देकर दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। उनकी पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने इसे अवैध हिरासत बताया। इसी दिन अभिजीत दीपके पर स्याही हमला भी हुआ, जिसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी जोड़ दी और खुद अनशन पर बैठने का फैसला किया।
20 जुलाई 2026 — संसद चलो मार्च और झड़प
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या 3,000 से बढ़कर 10,000 तक पहुंच गई। DMRC ने राजीव चौक, पटेल चौक और जनपथ समेत कई मेट्रो स्टेशन अस्थायी रूप से बंद किए। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच पहली झड़प हुई और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए RAF ने लाठीचार्ज किया।
24 जुलाई 2026 — सरकार-CJP बातचीत बेनतीजा
सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच बैठक बिना किसी अंतिम नतीजे के खत्म हुई। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, मृत छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजे और छात्रों पर दर्ज FIR वापसी की मांगों पर सहमति नहीं बन पाई। इसी दिन RAF ने छात्रों पर अनावश्यक बल प्रयोग की बात मान ली और अपने अफसरों-कार्मिकों को चेतावनी दी।
25 जुलाई 2026 — धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और आंदोलन का अंत
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिन से उनका मन दुखी था और इसीलिए उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया। इसके बाद CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास ने सरकार के साथ तीन प्रमुख मांगों पर सहमति बनने की पुष्टि करते हुए जंतर-मंतर से आंदोलन खत्म करने का औपचारिक ऐलान कर दिया। साथ ही केंद्र सरकार ने पेपर लीक पर सख्त कानून लाने के लिए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये जुर्माने वाले संशोधन विधेयक के मसौदे को भी मंजूरी दे दी।
आंदोलन का नतीजा क्या रहा?
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
- पेपर लीक पर सख्त कानून के लिए संशोधन विधेयक को मंजूरी (10 साल तक की सजा, 10 करोड़ जुर्माना)
- छात्रों पर दर्ज मामलों और मुआवजे को लेकर सरकार से सहमति
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. CJP आंदोलन क्या है और यह कब शुरू हुआ? CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन एक सोशल मीडिया व्यंग्य अभियान से शुरू हुआ और औपचारिक रूप से 6 जून 2026 को जंतर-मंतर, नई दिल्ली में पहला प्रदर्शन हुआ। यह मुख्य रूप से NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर था।
2. CJP आंदोलन की मुख्य मांगें क्या थीं? मुख्य मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, NEET पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा, और आंदोलनरत छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेना शामिल था।
3. सोनम वांगचुक इस आंदोलन से कैसे जुड़े? धरने के नौवें दिन सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पहुंचे और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। 19 जुलाई को बिगड़ती सेहत के चलते पुलिस ने उन्हें जबरन हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया।
4. संसद चलो मार्च कब हुआ था? संसद चलो मार्च 20 जुलाई 2026 को हुआ, जिसमें जंतर-मंतर पर करीब 10,000 प्रदर्शनकारी जुटे और सुरक्षाबलों के साथ झड़प भी हुई।
5. CJP आंदोलन कब और कैसे खत्म हुआ? 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार के साथ तीन प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद CJP प्रवक्ताओं ने जंतर-मंतर से आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया।
6. धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया? प्रधान ने कहा कि पिछले 10 दिन से वे मानसिक रूप से दुखी थे और छात्रों के हित में उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया।
7. आंदोलन के बाद सरकार ने क्या कदम उठाए? सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून का प्रस्ताव मंजूर किया, जिसमें 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
