ONGC ने RSS से जुड़े संगठनों को दिए 670 करोड़? जानें पूरा सच

ONGC RSS डोनेशन

क्या ONGC ने वाकई RSS को फंड किया? कितना पैसा, किन संगठनों को, कब — पूरी टाइमलाइन, आंकड़े और सरकार व विपक्ष दोनों पक्ष एक जगह पढ़ें।

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और कुछ न्यूज़ पोर्टल्स पर एक दावा तेज़ी से वायरल हो रहा है — कि सरकारी तेल कंपनी ONGC ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संगठनों को करोड़ों रुपये का दान दिया, और यह सब तब हुआ जब धर्मेंद्र प्रधान पेट्रोलियम मंत्री थे। यह दावा कितना सही है और असली तस्वीर क्या है, आइए विस्तार से समझते हैं।

दावा क्या है?

एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ONGC ने अपने CSR (कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व) फंड से 2013 से 2025 के बीच, यानी करीब 12 साल में, RSS से जुड़े 20 संगठनों को कुल ₹670.97 करोड़ रुपये का दान दिया। इनमें सेवा भारती, एकल विद्यालय और संघ से जुड़े अस्पताल व ट्रस्ट शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार इन 20 संगठनों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:

  • 9 संगठन सीधे RSS से संबद्ध (affiliated) हैं
  • 9 संगठन ऐसे हैं जिन्हें संघ से जुड़े व्यक्तियों ने शुरू किया या जो उनके नेतृत्व में चलते हैं
  • 2 संगठनों ने संघ के साथ मिलकर काम किया है

धर्मेंद्र प्रधान का इससे क्या संबंध है?

ONGC सहित देश की सभी सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत आती हैं। 2014 से 2021 तक यह मंत्रालय धर्मेंद्र प्रधान के पास था, इसलिए इस अवधि में हुए ज्यादातर CSR दान उनके कार्यकाल के दौरान हुए। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह ONGC का संस्थागत दान है, न कि धर्मेंद्र प्रधान का निजी दान — यानी पैसा उनकी जेब से नहीं, बल्कि सरकारी कंपनी के कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी बजट से गया। रिपोर्ट खुद यह भी मानती है कि ऐसे दान किसी और मंत्री के कार्यकाल में भी हो सकते थे, क्योंकि CSR के फैसले सीधे मंत्री नहीं, बल्कि कंपनी बोर्ड लेता है।

सबसे बड़े लाभार्थी कौन रहे?

  • BAVP (डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर वैद्यकीय प्रतिष्ठान) — असम के शिवसागर में 300-बेड अस्पताल के निर्माण के लिए करीब ₹434 करोड़, सबसे बड़ी राशि
  • DATSAS (डॉ. आबाजी थत्ते सेवा और अनुसंधान संस्था) — नागपुर में कैंसर अस्पताल (National Cancer Institute) के लिए करीब ₹140 करोड़ (2017-2022 के बीच)
  • S-VYASA (स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान), बेंगलुरु — हॉस्टल निर्माण व योग कार्यक्रमों के लिए ₹15.53 करोड़
  • सेवा भारती की विभिन्न इकाइयों को बाढ़ राहत, मेडिकल उपकरण और योग केंद्रों के लिए ₹13.95 करोड़

दूसरा पक्ष: क्या यह आंकड़ा बड़ा है या छोटा?

यहीं पर मामला संतुलित नजरिये की मांग करता है। आलोचकों और कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह रिपोर्ट पूरी तस्वीर नहीं दिखाती:

  • ONGC का कुल CSR खर्च (2015 से 2025 के बीच) करीब ₹4,531 करोड़ रहा, जो करीब 2,000 संगठनों और प्रोजेक्ट्स में बंटा।
  • इसमें से RSS से जुड़े संगठनों को गया ₹668 करोड़ सिर्फ 14.7% हिस्सा बनता है।
  • बाकी 85% से ज्यादा राशि (करीब ₹3,863 करोड़) करीब 1,980 अन्य असंबद्ध संगठनों को गई, जिनका RSS से कोई सीधा संबंध नहीं है।

यानी जहां एक पक्ष इसे “सरकारी पैसे का संघ इकोसिस्टम में जाना” बताकर बड़ा मुद्दा मानता है, वहीं दूसरा पक्ष इसे “कुल CSR खर्च का एक छोटा और सामान्य हिस्सा” बताकर तूल न देने की बात कहता है।

क्या यह गैरकानूनी है?

नहीं। भारत में कंपनी अधिनियम के तहत बड़ी सरकारी और निजी कंपनियों को अपने मुनाफे का एक हिस्सा CSR गतिविधियों — शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास जैसे कार्यों — में खर्च करना कानूनन अनिवार्य है। विवाद कानूनी वैधता को लेकर नहीं, बल्कि इस बात को लेकर है कि पैसा किन संगठनों तक पहुंचा और उनका वैचारिक जुड़ाव कितना गहरा है — और इस पर राय बंटी हुई है।

किन-किन संगठनों को कितना पैसा मिला — पूरी लिस्ट

The News Minute की जांच में सामने आए सभी 20 RSS से जुड़े संगठनों और उन्हें मिली राशि का पूरा ब्रेकडाउन इस प्रकार है:

टॉप 2 सबसे बड़े लाभार्थी

1. स्वर्गदेव सिउ-का-फा अस्पताल, असम — ₹434 करोड़ असम के शिवसागर जिले का यह 300-बेड मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल ONGC और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर वैद्यकीय प्रतिष्ठान (BAVP) मिलकर चलाते हैं। 2016 से 2024 के बीच इसके लिए ONGC ने अपने CSR फंड से करीब ₹434 करोड़ खर्च किए — यह सबसे बड़ी राशि है।

2. डॉ. आबाजी थत्ते सेवा और अनुसंधान संस्था, नागपुर — ₹140 करोड़ इस ट्रस्ट का नाम RSS के दूसरे सरसंघचालक एम.एस. गोलवलकर के निजी सहायक के नाम पर है। इसे 2017-2022 के बीच नागपुर में नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट बनाने के लिए ₹140 करोड़ मिले।

बाकी 18 संगठन (छोटी पर महत्वपूर्ण राशियां)

संगठनमिली राशिकिसलिए
S-VYASA (योग विश्वविद्यालय, बेंगलुरु)₹15.53 करोड़हॉस्टल निर्माण, योग कैंप
सेवा भारती (विभिन्न शाखाएं)₹13.95 करोड़मेडिकल उपकरण, बाढ़ राहत, हॉस्टल
रास्ट्रोत्थान परिषत₹11.6 करोड़सामाजिक सेवा गतिविधियां
एकल विद्यालय फाउंडेशन₹8.69 करोड़स्कूल संचालन
विवेकानंद मेडिकल रिसर्च ट्रस्ट₹7.47 करोड़मेडिकल रिसर्च
मोक्षदा पर्यावरण एवं वन सुरक्षा समिति₹5.12 करोड़ग्रीन शवदाहगृह (दिल्ली, UP आदि)
नेताजी सुभाष चंद्र बोस मिलिट्री एकेडमी (सिलवासा)₹4.5 करोड़स्टाफ क्वार्टर निर्माण
एकलव्य फाउंडेशन (तेलंगाना)₹4.72 करोड़स्टूडेंट हॉस्टल (ऑर्गेनिक फार्मिंग सेंटर)
समर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट (ओडिशा)₹4.3 करोड़आदिवासी छात्राओं के लिए हॉस्टल
विवेकानंद केंद्र₹3.96 करोड़सामाजिक सेवा मिशन
परम शक्ति पीठ (साध्वी ऋतंभरा)₹2.49 करोड़बच्चों के लिए डे-केयर सेंटर
राजू भैया सैनिक विद्या मंदिर₹2.20 करोड़आर्मी स्कूल
सरस्वती शिशु विद्या मंदिर₹2.09 करोड़स्कूल-हॉस्टल (ओडिशा, आंध्र, गुजरात)
शिशु शिक्षा समिति असम₹1.93 करोड़क्लासरूम, साइंस लैब, वाटर प्यूरीफायर
मानव सेवा प्रतिष्ठान (पश्चिम बंगाल)₹1.6 करोड़स्कूल हॉस्टल
देंदयाल रिसर्च इंस्टीट्यूट₹1.13 करोड़दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर
महाराजा शिवछत्रपति प्रतिष्ठान ट्रस्ट₹1 करोड़शिवाजी पर सांस्कृतिक कार्यक्रम
भारत विकास परिषद (राजस्थान)राशि स्पष्ट नहींमल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल

एक अतिरिक्त तथ्य

ONGC ने इसके अलावा PM-CARES फंड को ₹300 करोड़, ऑरोविल यूनिटी फंड को ₹130 करोड़, और गुजरात की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परियोजना के लिए करीब ₹100 करोड़ भी दिए हैं। 2018 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने ONGC और अन्य तेल कंपनियों को स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में दिए गए पैसे पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि यह प्रोजेक्ट “हेरिटेज एसेट” न होने के कारण CSR गतिविधि की श्रेणी में नहीं आता था।


निष्कर्ष

तथ्यों के आधार पर इतना साफ है कि ONGC के CSR फंड से करोड़ों रुपये RSS से जुड़े संगठनों तक पहुंचे, और यह ज्यादातर धर्मेंद्र प्रधान के मंत्री रहते हुए हुआ। लेकिन यह कहना गलत होगा कि प्रधान ने निजी तौर पर RSS को पैसा दिया, या कि ONGC ने सिर्फ RSS को फंड करने के लिए अपना CSR बजट इस्तेमाल किया — क्योंकि यह राशि कुल खर्च का एक छोटा हिस्सा है। पाठकों को इस मुद्दे पर दोनों पहलू देखकर ही अपनी राय बनानी चाहिए।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. क्या धर्मेंद्र प्रधान ने निजी तौर पर RSS को दान दिया? नहीं, यह दावा गलत है। दान ONGC के संस्थागत CSR फंड से हुआ, धर्मेंद्र प्रधान की निजी जेब से नहीं — हालांकि यह उनके पेट्रोलियम मंत्री रहते (2014-2021) ज्यादातर हुआ।

Q2. ONGC ने RSS से जुड़े संगठनों को कितना पैसा दिया? 2013 से 2025 के बीच करीब ₹670.97 करोड़ रुपये, 20 RSS से जुड़े संगठनों को, एक रिपोर्ट के अनुसार।

Q3. यह ONGC के कुल CSR बजट का कितना हिस्सा है? करीब 14.7% — कुल ₹4,531 करोड़ के CSR खर्च में से ₹668 करोड़ इन 20 संगठनों को गया, बाकी 85% से ज्यादा अन्य 1,980 संगठनों को।

Q4. सबसे ज्यादा फंड किसे मिला? असम के शिवसागर अस्पताल के लिए BAVP को ₹434 करोड़ और नागपुर कैंसर अस्पताल के लिए DATSAS को ₹140 करोड़, सबसे बड़ी राशियां रहीं।

Q5. क्या यह दान गैरकानूनी था? नहीं, CSR कानून के तहत यह वैध खर्च है। विवाद कानूनी नहीं, बल्कि लाभार्थी संगठनों के वैचारिक जुड़ाव को लेकर है।

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