Gwalior के CA से 21 करोड़ की ठगी: पूरी कहानी | ग्वालियर Crypto Scam 2026

ग्वालियर CA 21 करोड़ ठगी

Gwalior के 70 साल के CA अशोक विजयवर्गीय से फर्जी क्रिप्टो ट्रेडिंग पोर्टल के ज़रिए 21 करोड़ की ठगी कैसे हुई? पूरी कहानी, ठगी का तरीका और बचाव के तरीके जानें।

एक नज़र में

बिंदुविवरण
पीड़ितअशोक विजयवर्गीय, 70 वर्ष, वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट
पदचीफ रिटर्निंग ऑफिसर, मध्य प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज
निवासरोशनी घर क्षेत्र, ग्वालियर
कुल नुकसान₹21,05,92,000 (21 करोड़ 5 लाख 92 हज़ार)
अवधिदिसंबर 2025 से जुलाई 2026 (लगभग 7 महीने)
तरीकाफर्जी क्रिप्टोकरेंसी (USDT) ट्रेडिंग पोर्टल
शिकायत दर्ज10 जुलाई 2026, स्टेट साइबर सेल, ग्वालियर
जांच अधिकारीसंजीव नयन शर्मा, DSP, स्टेट साइबर सेल

शुरुआत: “हैलो… मैं दिव्या बोल रही हूं”

दिसंबर 2025 में अशोक विजयवर्गीय के पास व्हाट्सऐप पर एक अनजान महिला का मैसेज आया। खुद को “दिव्या सिंह” बताने वाली यह महिला बेंगलुरु की रहने वाली होने का दावा करती थी। सोशल मीडिया के ज़रिए दोस्ती बढ़ी और धीरे-धीरे बातचीत क्रिप्टोकरेंसी में निवेश की ओर मुड़ गई। उसने पीड़ित को Bitcoin और USDT (Tether) जैसी क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेडिंग करने वाले एक ऑनलाइन पोर्टल पर जाने और निवेश शुरू करने के लिए राज़ी किया।

यह ठगी किसी बड़ी रकम की मांग से शुरू नहीं हुई — जैसा कि आमतौर पर निवेश घोटालों में होता है। पहली बार में पीड़ित ने मात्र ₹1 लाख का निवेश किया, और तुरंत उसे करीब ₹1.84-1.88 लाख का रिटर्न भी मिल गया। यह छोटा-सा मुनाफा असल पैसा था, जो जानबूझकर दिखाया गया ताकि पोर्टल भरोसेमंद लगे और पीड़ित का विश्वास मजबूत हो जाए।

जाल कैसे फैलता गया

भरोसा बनने के बाद पीड़ित ने बड़ी रकम निवेश करनी शुरू कर दी — करीब ₹10 से 12 करोड़ तक। लेकिन इसके बाद जो मुनाफा दिखाया गया, वह केवल ट्रेडिंग पोर्टल की स्क्रीन पर काल्पनिक आंकड़ों के रूप में था; असल बैंक खाते में कभी क्रेडिट नहीं हुआ। जैसे-जैसे निवेश बढ़ता गया, पोर्टल पर दिखने वाला मुनाफा भी तेज़ी से बढ़ता गया, और अंततः स्क्रीन पर करीब ₹33.25 करोड़ का काल्पनिक बैलेंस दिखने लगा।

जब विजयवर्गीय ने यह रकम निकालने की कोशिश की, तो निकासी अटका दी गई। ठगों ने कहा कि पैसा रिलीज़ होने से पहले करीब ₹10.84 करोड़ “इनकम टैक्स” के रूप में जमा करना होगा। पीड़ित ने भरोसे में आकर करीब ₹5.5 करोड़ और जमा कर दिए। इसके बाद भी हर बार जब उसने पैसा निकालने की कोशिश की, ठगों ने कोई नई मांग रख दी — एक मौके पर “रिस्क मार्जिन” के नाम पर अतिरिक्त ₹1 करोड़ की मांग की गई, यह कहकर कि निकासी की रकम बहुत बड़ी है।

यह वही तरीका है जो ज़्यादातर ऑनलाइन निवेश घोटालों में देखा जाता है — पहले छोटी निकासी दिखाकर भरोसा जीतो, फिर बड़ी रकम डलवाओ, और आखिर में टैक्स, कमीशन या प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसा फंसाए रखो।

जुलाई 2026 के पहले हफ्ते में जाकर विजयवर्गीय को एहसास हुआ कि स्क्रीन पर दिख रहा मुनाफा कभी असली था ही नहीं। कुल मिलाकर उन्होंने 7 महीनों में ठगों द्वारा दिए गए अलग-अलग बैंक खातों में ₹21,05,92,000 ट्रांसफर कर दिए थे।

शिकायत और FIR

एहसास होने के बाद विजयवर्गीय ने आगे पैसा जमा करना बंद कर दिया और 10 जुलाई 2026 को ग्वालियर स्टेट साइबर सेल कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने व्हाट्सऐप चैट, स्क्रीनशॉट और बैंक स्टेटमेंट जैसे सबूत भी साइबर सेल को सौंपे।

अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 319(2) तथा IT एक्ट की धारा 66D के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जांच में अब तक क्या सामने आया

DSP संजीव नयन शर्मा के मुताबिक, यह मामला देश के सबसे बड़े क्रिप्टो निवेश धोखाधड़ी नेटवर्क में से एक माना जा रहा है। जांच में सामने आया है कि:

  • ठगी में तीन व्हाट्सऐप नंबर और करीब 20 बैंक खातों का इस्तेमाल हुआ।
  • पैसा एक चार-स्तरीय (four-layer) नेटवर्क के ज़रिए घुमाया गया, जिसमें 20,000 से ज़्यादा ट्रांजैक्शन शामिल हैं।
  • ये खाते कर्नाटक, तमिलनाडु से लेकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल तक फैले हुए हैं।
  • साइबर सेल की टीम अब उन 77 पहले-स्तर (first-layer) खातों पर फोकस कर रही है जिनमें सीधे पैसा प्राप्त हुआ था।
  • अब तक करीब ₹2 करोड़ फ्रीज किए जा चुके हैं, बाकी रकम की ट्रेसिंग जारी है।
  • पुलिस व्हाट्सऐप नंबरों, IP एड्रेस और फर्जी ट्रेडिंग पोर्टल की उत्पत्ति (origin) का पता लगाने में जुटी है।

यह घोटाला खतरनाक क्यों है

इस केस की सबसे चिंताजनक बात यह है कि पीड़ित कोई अनुभवहीन निवेशक नहीं था — वे खुद एक वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट और मध्य प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स के चीफ रिटर्निंग ऑफिसर जैसे ज़िम्मेदार पद पर थे। यह दिखाता है कि आधुनिक साइबर ठग तकनीकी हथकंडों से ज़्यादा मनोवैज्ञानिक जाल (psychological manipulation) पर भरोसा करते हैं — धीरे-धीरे भरोसा बनाना, छोटी सफलता दिखाना, और फिर लालच व दबाव के मिश्रण से बड़ी रकम ऐंठना।

ठगी का पैटर्न — कदम दर कदम

  1. संपर्क: सोशल मीडिया/व्हाट्सऐप पर अनजान व्यक्ति की तरफ से दोस्ताना बातचीत शुरू होती है।
  2. विश्वास-निर्माण: छोटी रकम के निवेश पर वास्तविक मुनाफा दिखाकर/दिलाकर भरोसा जीता जाता है।
  3. फर्जी पोर्टल: पीड़ित को एक दिखने में असली जैसे ट्रेडिंग पोर्टल पर निवेश करने के लिए राज़ी किया जाता है।
  4. काल्पनिक मुनाफा: पोर्टल की स्क्रीन पर तेज़ी से बढ़ता मुनाफा दिखाया जाता है, जो असल में कहीं मौजूद नहीं होता।
  5. निकासी में रुकावट: जब निकासी की कोशिश होती है, तो टैक्स, कमीशन, प्रोसेसिंग फीस या “रिस्क मार्जिन” जैसे बहानों से नई मांगें रखी जाती हैं।
  6. पैसे का बिखराव: प्राप्त रकम को तुरंत कई परतों में अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है, ताकि ट्रेसिंग मुश्किल हो जाए।

खुद को कैसे बचाएं — ज़रूरी सावधानियां

  • कोई भी निवेश स्कीम जो असामान्य रूप से ऊंचा रिटर्न और बेहद कम या शून्य जोखिम का वादा करे, वहां सतर्क हो जाएं।
  • किसी अनजान व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया/व्हाट्सऐप पर सुझाए गए ट्रेडिंग पोर्टल पर निवेश करने से पहले उसकी वैधता (SEBI/RBI रजिस्ट्रेशन आदि) अच्छी तरह जांच लें।
  • शुरुआती छोटा मुनाफा मिलना “प्लेटफॉर्म असली है” का सबूत नहीं है — यह भरोसा जीतने की रणनीति भी हो सकती है।
  • निकासी के समय अगर टैक्स, फीस या मार्जिन के नाम पर बार-बार नई रकम मांगी जाए, तो यह सबसे बड़ा खतरे का संकेत (red flag) है।
  • संदेह होते ही तुरंत और आगे पैसा जमा करना बंद करें और नज़दीकी साइबर सेल या 1930 (नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर शिकायत दर्ज कराएं।
  • हर लेन-देन, चैट और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें — ये सबूत जांच में बेहद अहम होते हैं।

निष्कर्ष

ग्वालियर का यह ₹21 करोड़ का मामला मध्य प्रदेश के अब तक के सबसे बड़े ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी मामलों में गिना जा रहा है। यह इस बात की एक कड़ी चेतावनी है कि साइबर अपराधी अब सिर्फ अनजान या कम जानकारी रखने वाले लोगों को नहीं, बल्कि वित्तीय क्षेत्र के अनुभवी पेशेवरों को भी बड़ी चतुराई से निशाना बना रहे हैं। जांच अभी जारी है, और आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस देशभर में फैले बैंक खातों और डिजिटल सबूतों की छानबीन कर रही है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. ग्वालियर के CA के साथ कितने करोड़ की ठगी हुई?

ग्वालियर के वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय के साथ कुल ₹21,05,92,000 (21 करोड़ 5 लाख 92 हज़ार रुपये) की ठगी हुई।

2. ठगी करने वालों ने पीड़ित से संपर्क कैसे किया?

ठगों ने खुद को “दिव्या सिंह” नाम की एक महिला बताकर व्हाट्सऐप पर संपर्क किया और धीरे-धीरे क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के लिए राज़ी किया।

3. यह ठगी कितने समय में हुई? यह ठगी करीब 7 महीनों में हुई — दिसंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच।

4. पीड़ित ने शिकायत कब और कहां दर्ज कराई?

पीड़ित ने 10 जुलाई 2026 को ग्वालियर स्टेट साइबर सेल कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई।

5. किस कानून के तहत केस दर्ज हुआ है?

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 319(2), तथा IT एक्ट की धारा 66D के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

6. अब तक जांच में क्या सामने आया है?

ठगी में 3 व्हाट्सऐप नंबर, करीब 20 बैंक खाते और एक चार-स्तरीय नेटवर्क का इस्तेमाल हुआ, जिसमें 20,000 से ज़्यादा ट्रांजैक्शन शामिल हैं। अब तक करीब ₹2 करोड़ फ्रीज किए जा चुके हैं।

7. क्या पैसा वापस मिलने की संभावना है?

साइबर सेल फंड ट्रेल की जांच कर रही है और कुछ रकम फ्रीज की जा चुकी है, लेकिन पूरी रकम वापस मिलना पैसों की ट्रेसिंग और आरोपियों तक पहुंचने पर निर्भर करता है।

8. ऐसी क्रिप्टो ठगी से खुद को कैसे बचाएं?

असामान्य रूप से ऊंचे रिटर्न के वादों से सतर्क रहें, किसी अनजान व्यक्ति द्वारा सुझाए गए पोर्टल पर निवेश से पहले उसकी वैधता जांचें, और निकासी के समय बार-बार नई फीस मांगे जाने को खतरे का संकेत समझें।


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