NEET UG 2026: NTA को तुरंत भंग करने की मांग, डॉक्टरों का संगठन पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, रखी ये 5 बड़ी मांगें

NEET-UG 2026

NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद में बड़ा मोड़! डॉक्टरों के संगठन FAIMA ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर NTA को तुरंत भंग करने और कोर्ट की निगरानी में दोबारा परीक्षा (Re-exam) कराने की मांग की है। पूरी खबर पढ़ें।

नई दिल्ली / ग्वालियर: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 में हुए कथित पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद देश का चिकित्सा समुदाय (Medical Community) अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। देश के प्रमुख डॉक्टरों के संगठनों—FAIMA (Federation of All India Medical Association) और UDF (United Doctors Front)—ने अब सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। डॉक्टरों की मांग है कि बार-बार विवादों में घिरने वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को तुरंत भंग किया जाए।

याचिकाकर्ताओं ने NTA के मौजूदा ढांचे को पूरी तरह “सिस्टम की विफलता” (Systemic Failure) करार दिया है और देश की चिकित्सा शिक्षा प्रणाली की साख बचाने के लिए शीर्ष अदालत से तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है।

डॉक्टरों के संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से क्या मांगें की हैं? (Key Demands)

एडवर्ट तन्वी दुबे के माध्यम से दायर इस याचिका में डॉक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट के सामने 5 सबसे महत्वपूर्ण बिंदु रखे हैं:

1. NTA को भंग कर नई स्वतंत्र संस्था का गठन

डॉक्टरों का कहना है कि NTA वर्तमान में केवल सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड है, जिससे इसकी जवाबदेही तय नहीं हो पा रही है। इसकी जगह संसद के विशेष कानून के तहत एक स्वायत्त और तकनीकी रूप से सक्षम National Examination Integrity Commission (NEIC) का गठन किया जाना चाहिए।

2. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में दोबारा परीक्षा (Court-Monitored Re-exam)

याचिका में मांग की गई है कि 3 मई को रद्द हुई NEET-UG 2026 परीक्षा को दोबारा आयोजित कराने की पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त (Retired) न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति की देखरेख में हो, ताकि आगे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

3. ऑनलाइन परीक्षा (CBT Model) लागू हो

फिजिकल पेपर (Pen-Paper Mode) के परिवहन और छपाई के दौरान लीक होने वाले जोखिम को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए, भविष्य में NEET परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (Computer-Based Test) मॉडल पर कराने की मांग की गई है।

4. CBI जांच की समयबद्ध स्टेटस रिपोर्ट

डॉक्टरों ने मांग की है कि पेपर लीक रैकेट की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को निर्देश दिया जाए कि वह आगामी 4 सप्ताह के भीतर अपनी जांच और अब तक हुई गिरफ्तारियों की स्टेटस रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपे।

5. सेंटर-वाइज रिजल्ट सार्वजनिक किए जाएं

परीक्षा में किसी भी प्रकार के संदिग्ध पैटर्न, जैसे- किसी एक विशेष परीक्षा केंद्र से अचानक कई टॉपर्स का निकलना, को आसानी से पकड़ने के लिए सभी सेंटर्स के परिणाम अलग से सार्वजनिक किए जाने चाहिए।


छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और मौलिक अधिकारों का हवाला

याचिका में डॉक्टरों ने भावुक और कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षाओं के रद्द होने से लगभग 22.7 लाख छात्र गहरे मानसिक तनाव और अवसाद से गुजर रहे हैं। यह स्थिति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है, क्योंकि इससे योग्य छात्रों का हक मारा जा रहा है।

क्या है पूरा NEET UG 2026 विवाद?

आपको बता दें कि इस साल 3 मई 2026 को आयोजित हुई NEET-UG 2026 परीक्षा से ठीक पहले राजस्थान पुलिस की SOG और अन्य राज्यों की जांच एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया था। जांच में सामने आया था कि परीक्षा से करीब 42 घंटे पहले ही व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स पर हूबहू प्रश्नपत्र लीक कर दिए गए थे। मामले की गंभीरता और छात्रों के भारी विरोध को देखते हुए केंद्र सरकार ने परीक्षा रद्द कर जांच CBI को सौंप दी थी।

अब देखना यह होगा कि डॉक्टरों की इस बड़ी मांग और NTA के भविष्य पर सुप्रीम कोर्ट क्या कड़ा रुख अपनाता है।

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