सिंधिया संपत्ति विवाद में नया मोड़, बुआ की बेटी प्रतिमा देवी का दावा शामिल, 7 अक्टूबर को सुनवाई

सिंधिया राजपरिवार बंटवारा

ग्वालियर सिंधिया राजपरिवार की करीब 41 हजार करोड़ की संपत्ति विवाद में प्रतिमा देवी की आपत्ति कोर्ट ने स्वीकार की। जानें 1989 से चली आ रही इस शाही जंग की पूरी कहानी

ग्वालियर के सिंधिया राजपरिवार की करीब 40 से 41 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े विवाद में गुरुवार को अहम मोड़ आया। ग्वालियर की एडीजे कोर्ट ने प्रतिमा देवी राणा की आपत्ति याचिका को स्वीकार करते हुए उसे मुख्य मामले का हिस्सा बना लिया है। अब कोर्ट ने साफ कर दिया है कि प्रतिमा देवी का पक्ष सुने बिना संपत्ति समझौते से जुड़ी अर्जी पर कोई फैसला नहीं होगा। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी, जिसमें संपत्ति बंटवारे के मुद्दे पर बहस तय है।

विवाद की जड़ें: 1989 से चली आ रही शाही जंग

यह मामला दरअसल चार दशक पुराना है। 1989 में बालिग होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खुद को राजघराने की संपत्ति का एकमात्र उत्तराधिकारी बताते हुए ग्वालियर कोर्ट में दीवानी वाद दायर किया था। उनका दावा “ज्येष्ठाधिकार” यानी प्राइमोजेनिचर की उस परंपरा पर आधारित था, जिसके तहत परंपरागत राजशाही में शासक की मृत्यु के बाद संपूर्ण निजी और रियासती संपत्ति पर सिर्फ सबसे बड़े वैध पुत्र का अधिकार माना जाता था। उस दौर में राजमाता विजयाराजे सिंधिया खुद इस मुकदमे में प्रतिवादी थीं। 2001 में उनके निधन के बाद यह जिम्मेदारी उनकी बेटियों पर आ गई।

दूसरी ओर, उषा राजे, वसुंधरा राजे (राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री) और यशोधरा राजे (मध्यप्रदेश की खेल एवं युवक कल्याण मंत्री) ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 का हवाला देकर संपत्ति में समान अधिकार का दावा किया। उनकी दलील राजमाता द्वारा 1984 में बनाई गई वसीयत और पार्टीशन डीड पर टिकी है, जिसमें बेटियों को भी हिस्सा दिया गया था। मामले की पृष्ठभूमि और पीछे जाती है — 1961 में महाराजा जीवाजीराव सिंधिया के निधन के बाद सरकार ने प्रमाणपत्र जारी कर माधवराव सिंधिया को उनकी निजी संपत्ति का एकमात्र उत्तराधिकारी घोषित किया था।

जुलाई में कैविएट, सितंबर में औपचारिक आपत्ति

इस साल जुलाई में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं के बीच संपत्ति बंटवारे पर सहमति बनने की खबर आई थी, और यह समझौता कोर्ट की मंजूरी के लिए पेश भी किया गया। लेकिन अंतिम आदेश से ठीक पहले प्रतिमा देवी ने कैविएट दाखिल कर अपनी मां (ननिहाल पक्ष) की संपत्ति पर दावा जता दिया था, और अदालत से मांग की थी कि उनका पक्ष सुने बिना कोई अंतिम फैसला न हो। सितंबर में यही आपत्ति औपचारिक रूप से स्वीकार कर मुख्य मामले में जोड़ दी गई है।

प्रतिमा देवी की आपत्ति क्या है

प्रतिमा देवी, ज्योतिरादित्य सिंधिया की स्वर्गीय बुआ पद्मराजे राणा (पद्मावती राजे सिंधिया) की बेटी हैं। पिछली सुनवाई में वे खुद अपनी बेटी शिवांगी और दामाद प्रतीक कार्की के साथ ग्वालियर जिला अदालत पहुंची थीं। उन्होंने कोर्ट में कहा था कि उन्हें राजमाता विजयाराजे सिंधिया की वसीयत की जानकारी कभी नहीं दी गई और न ही जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।

प्रतिमा देवी करीब 20 वर्षों से नेपाल की राजधानी काठमांडू में, पशुपतिनाथ मंदिर के पास रहती हैं। उनका कहना है कि मामले से जुड़े नोटिस उन्हें गलत पते पर भेजे गए, जिस वजह से वे कभी उन तक पहुंचे ही नहीं। इसी आधार पर उन्होंने खुद को एकतरफा कार्रवाई से बाहर रखे जाने पर सवाल उठाया और संपत्ति में बराबर हिस्सेदारी की मांग की।

परिवार की तरफ से क्या दलील दी गई

ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से पहले ही प्रतिमा देवी की आपत्ति का जवाब कोर्ट में पेश किया जा चुका है। इस पक्ष का कहना है कि समझौते की प्रक्रिया के दौरान प्रतिमा देवी को पूरी जानकारी थी और उन्होंने सहमति के साथ संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी किए थे। इसके समर्थन में पुराने दस्तावेज और पारिवारिक तस्वीरें भी अदालत में पेश की जा चुकी हैं। प्रतिमा देवी की ओर से इन दावों पर आपत्ति जताई गई है, और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर की वैधता को लेकर अब कोर्ट में आगे बहस होगी।

कितनी बड़ी और कहां-कहां फैली है यह संपत्ति

सिंधिया राजवंश का इतिहास 1731 से शुरू होता है, जब यह परिवार पहले मराठा साम्राज्य में सेनापति और बाद में अंग्रेजों के दौर में मध्य भारत पर करीब 217 साल तक शासन करता रहा। विवाद के दायरे में ग्वालियर का प्रसिद्ध जय विलास पैलेस, उषा किरण पैलेस, शिवपुरी स्थित माधव पैलेस के साथ-साथ मुंबई तक फैली संपत्तियां आती हैं। राजपरिवार की अधिकांश संपत्तियां किसी एक व्यक्ति के नाम पर नहीं, बल्कि अलग-अलग ट्रस्टों में दर्ज हैं।

कोर्ट का आदेश और अगली सुनवाई

गुरुवार को हुई सुनवाई में प्रतिमा देवी की ओर से उनके दामाद प्रतीक कार्की अदालत में मौजूद रहे। सिंधिया राजपरिवार के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत शर्मा के अनुसार, कोर्ट ने प्रतिमा देवी की आपत्ति को स्वीकार करते हुए उसे मुख्य सुनवाई में शामिल कर लिया है। कोर्ट ने सभी पक्षों को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। अब 7 अक्टूबर को संपत्ति बंटवारे के मुद्दे के साथ-साथ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर की सहमति से जुड़े दावे पर भी बहस होगी।

FAQ:


Q1. सिंधिया संपत्ति विवाद में अगली सुनवाई कब होगी?

Answer: मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को ग्वालियर की अदालत में होगी, जिसमें संपत्ति बंटवारे के मुद्दे पर बहस होगी।

Q2. प्रतिमा देवी कौन हैं?


Answer: प्रतिमा देवी, ज्योतिरादित्य सिंधिया की स्वर्गीय बुआ पद्मराजे राणा की बेटी हैं और करीब 20 वर्षों से काठमांडू, नेपाल में रहती हैं

Q3. यह संपत्ति विवाद कब शुरू हुआ था?

Answer: यह विवाद 1989 में शुरू हुआ, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने “ज्येष्ठाधिकार” की परंपरा का हवाला देकर खुद को संपत्ति का एकमात्र उत्तराधिकारी बताते हुए कोर्ट में दावा पेश किया था।

Q4. ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआओं का दावा किस कानून पर आधारित है?


Answer: उषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे का दावा हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 और राजमाता विजयाराजे सिंधिया की 1984 की वसीयत व पार्टीशन डीड पर आधारित है।

Q5. विवाद में कौन-कौन सी संपत्तियां शामिल हैं?


Answer: इसमें ग्वालियर का जय विलास पैलेस, उषा किरण पैलेस, शिवपुरी का माधव पैलेस और मुंबई तक फैली अन्य संपत्तियां शामिल हैं, जो ज्यादातर ट्रस्टों के नाम पर दर्ज हैं।

SOURCE/FACT CHECK NOTE:

यह रिपोर्ट Amar Ujala, TheSootr, Mediasaheb, Lalluram, Rashtrachandika, Vistaar News, Patrika और Palpal India की जुलाई-सितंबर 2026 की रिपोर्टों पर आधारित है। संपत्ति के मूल्य (40 हजार करोड़ बनाम 41 हजार करोड़) को लेकर स्रोतों में मामूली अंतर है, दोनों आंकड़े लेख में शामिल किए गए हैं।

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